चलते चलते🚶‍♂️🤦‍♂️🧎‍♂️

रोहन गुस्से में निकल गया घर से, नाराज़ था सभी से.. मां, पापा और बहन तीनों से.. बोलते जा रहा कि अब कभी घर लौट कर नहीं आऊंगा और कोई कभी ढूंढ नहीं पाएगा उसे

ये कोई आज की कहानी नहीं है, मां हमेशा मुझसे सौतेला सलूक करती है और बहन को ज्यादा प्यार मिलता है मुझसे.. उसी को सब मनपसंद चीजें मिलती है और सारी फरमाइशें भी पूरी होती है, पर मेरे लिए कुछ भी अच्छा नहीं होता

यूंही सोचते, चलते चलते, बहुत आगे आ गया.. सामने थोड़ी सुनसान सड़क थी, उसके आगे एक बस्ती

16 साल का रोहन, बहन 12 बरस की.. पापा सरकारी मुलाजिम, पोस्ट ऑफिस में बाबू की नौकरी करते हैं और मां घर की देखभाल। बहुत देर हुई रोहन आया नहीं, मां पापा को चिंता हुई और वो उसे ढूंढने निकल पड़े

शाम तो पहले ही हो गई थी, अब धीरे धीरे थोड़ा अंधेरा हो चला..* रोहन सामने की और चल रहा था कि *तभी पास वाली झोपडी से किसी के रोने की आवाज़ आई

पास जाकर देखा तो एक लड़की रो रही थी, वो रोहन की बहन से कुछ ही छोटी होगी.. मां ने पूछा की क्यूं रो रही हो बेटी तो बोली कि भैया आज मेरे लिए तोहफा लाने वाला था पर अब तक नहीं आया, कहकर फिर से रोने लग गई

कुछ ही पलों में रोहन देखता है कि उसके हमउम्र का लड़का अन्दर आता है और अपनी बहन को आंखें बंद करने को कहता है, बहन आंखें बंद करती है और रोहन एक एक करके तीन तोहफे निकालता है – एक ड्रेस, चप्पल की जोड़ी और गुड़िया

अचानक रोहन की नजर उस लड़के के हाथ में बुट पॉलिश के बक्से पर पड़ती है, उसे समझने में जरा भी देर नहीं लगती की लड़का क्या काम करता है और कैसे अपने परिवार की जरूरत पूरी कर रहा

पीछे जैसे ही पलटा तो मां पापा और बहन  इस तरफ ही आ रहे थे, रोहन से रहा नहीं गया.. वो तेजी से भाग कर सबके गले लग गया और फुट फुट कर रोने लगा

वो कुछ बोलने की स्थति में नहीं था, पर मन ही मन निश्चय कर चुका था.. एक अच्छा भाई, एक अच्छा बेटा बनने का.. जितने सुख उसे मिलते हैं, उसका 1% भी बहुत लोगों को नहीं मिलता पर उसे कद्र नहीं थी अब तक..

वो ना सिर्फ खुद को बदलने के बारे में सोच रहा था, बल्कि साथ ही इस उधेड़बन में था की कैसे उस झोपड़ी वाले लड़के को पढ़ाया जाए..

रोहन बदल चुका था, और उसका इतना सोचना ही आने वाले कल की रोशनी की पहचान थी…

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