बुढ़िया की सीख 🧏‍♀️🧛‍♂️

मिस्टर मित्तल, बिजनेस टायकून, एक बहुत बड़ी टैक्सटाइल कंपनी के मालिक.. और भी कुछ छोटे व्यवसाय हैं उनके

वक़्त के बड़े पाबंद और हमेशा व्यस्त रहने वाले, आज भी ठीक समय पर घर से निकले.. 20 से ज्यादा महंगी कारें हैं, आज मन हुआ सो ऑडी में सफर कर रहे

ऑफिस घर से करीब आधा घंटा दूरी पर है, यहां कार निकली और वहां उनकी मीटिंग शुरू फोन पर

कोई 10 मिनट बाद एक टर्न पर, सहसा उनकी निगाह फुटपाथ पर छोटी सी चाई, समोसे की घुमटी पर पड़ी जो एक बुढ़िया चला रही थी.. लेकिन उनका ध्यान कहीं और था

ड्राइवर से गाड़ी रुकवा कर वो चले मिलने बुढ़िया से, दरअसल दुकान के आजू बाजू दो पोस्टर लगे थे और नीचे बड़े बॉक्स.. एक पर लिखा था खुशियां बाटों, दूसरे पर खुशियां ले जाओ

पास जाकर पूछा उन्होंने की ये क्यूं लगाया और कैसे काम करता है.. बुढ़िया ने बड़े प्यार से समझाया कि साहेब हम तो गरीब लोग हैं और छोटी छोटी चीजों में ही खुशियां ढूंढ लेते हैं.. यहां जब भी किसी के पास कुछ ज्यादा होता है, काम की वस्तु नहीं होती या फिर मन दान करने का होता है तो वो कुछ ना कुछ रख देता है खुशियां बाटों वाले बॉक्स में

वहीं बहुत से जरूरतमंद हैं, जब जिसे भी कुछ जरूरत होती है तो वो आकर खुशियां ले जाओ वाले बॉक्स में से ले जाता है और इस तरह सिलसिला चलता रहता है.. चीजें खाने की भी हो सकती है या फिर दूसरी जरूरत की लेकिन बहुत महंगी नहीं

वैसे भी यहां गरीब लोग ही आते हैं और वो कोई भी छोटी चीज से ही बहुत खुश हो जाते हैं और अपने घर थोड़ी खुशियां ले जाते हैं.. ये कहते कहते बुढ़िया की आंख में आंसू आ गए, वो आगे कहती है कि वो अपने बच्चों को बहुत सी छोटी छोटी चीजें नहीं दे पाई गरीबी के चलते और अब चाहती है कि दूसरे ना देखे वैसी तकलीफ..

मिस्टर मित्तल के पास कोई शब्द नहीं थे, वो चुपचाप अपनी कार में जाकर ऑफिस की तरफ बढ़ गए.. आज वो अपने आप को बहुत छोटा महसूस कर रहे थे उस बुढ़िया के आगे, उनकी करोड़ों की दौलत लग रहा किसी के काम की नहीं

खुद को स्वार्थ का बादशाह जानकर बरबस ही रो दिए.. अब उन्हें सही दिशा मिल गई थी आगे कुछ अच्छे काम करने की

मन में सैकड़ों सवाल लिए, कुछ आगे के बारे में सोच लिए, वो फिर से अपनी मीटिंग में व्यस्त हो गए.. लेकिन अब रास्ता साफ नजर आ रहा था उन्हें, जिंदगी जीने का.. दूसरों की तकलीफें समझ कर उन्हें खुशियां देने का…

😑😐🧐☺️😘