शुभ संध्या🌦️🌺🎋🍁🌦️

शाम का मौसम, रंगीन नज़ारा,
सुहाना आसमां, महक रहा जहां सारा!
कोरोना ने किया पास अपनों को,
मिटा रहा हर दिन दिलों की दूरी!!

पहले कहां था इतना समय,
की पूछ सके परख खैर खबर!
अब तो एक एक शब्द पढ़ा जाता,
मन में उतार कर अर्थ समझा जाता!!

मिलकर बांटें खुशियां एक दूसरे से,
गम सबके अपनी दुआओं से हटाएं!
कहां घर के चार लोगों में भी थी एक दूरी,
अब तो सारा जनकपुरी एक माला में पिरोया!!

यूं तो ज़रूर बहुत कुछ खो दिया,
पर जो मिला वो कुछ ज्यादा दिया!
ऐसे ही निकल जाती बेमंजिल जिंदगी,
कुछ सोचा कुछ समझा एक नई बंदिगी!!

शहर के शहर वीरान पड़े,
जंगल जंगली नाच उठे!
कहते रहे हम जिनको समझदार,
वो सिर्फ एक धक्के से घायल हुए!!

प्रकृति आज बोल रही, हमको अच्छे से सीखा रही,
रुको, ठहरो समझ कर आगे बढ़ो!
जो जीवन सिर्फ खुद के लिए रहे,
वो किसी अर्थ का नहीं!!
रुपया पैसा बहुत ना काम आया,
सबको खुली जेल में बंद पाया!
जीवन थोड़े में जी सकते हैं,
चाहो तो हजार आंखों को खुशी दे सकते हैं!!

चाहो तो हजारों को भोजन दे सकते हैं,
अपनी जरूरतों में कुछ कमी करके,
चाहो तो हजार आंखों को नया जीवन दे सकते हैं!! 😑😐😑