श्रावण मास – शिवजी चले भक्तों से मिलने

श्रावण मास, शिवजी की आराधना के लिए सबसे स्वर्णिम अवसर होता है। 
भोलेनाथ धरती के लिए निकल ही रहे थे कि माता पार्वती बोली – प्रभु आप कहां जा रहे हैं?


प्रभु बोले, अपने कुछ भक्तों से मिलने..
माता बोली, कुछ.. 😳 प्रभु, पूरी दुनिया आपकी भक्त है.. और अगर आप सिर्फ मंदिरों में भी गए तो करोड़ों भक्त होंगे.. फिर आप किस किस से मिलोगे।


प्रभु मुस्करा कर बोले, देवी – आप जानती है कि उन लाखों करोड़ों भक्तों का भी समय आएगा लेकिन इतनी जल्दी नहीं.. अभी तो मैं उन भक्तों से मिलने जा रहा हूं जो निस्वार्थ भाव से मानव कल्याण के लिए कार्य करते हैं, उनकी सेवा करते हैं
और ऐसे भक्त तो ज्यादा नहीं है, श्रावण मास में उन भक्तों के दर्शन करने मैं खुद जाऊंगा।


देवी बोली, आप तो अन्तर्यामी हैं प्रभु.. फिर यहीं से सब देख सकते हैं तो जाने की आश्यकता क्या है.. 
देवी, ऐसे मनुष्यों के दर्शन में मेरा स्वार्थ छिपा है.. मुझे जितनी खुशी उनसे खुद मिलकर होगी, करीब से देखकर होगी वो यहां से नहीं। ऐसी पुण्य आत्माओं के दर्शन का अभिलाषी मै स्वयं रहता हूं.. 


देवी, सब कुछ मेरा ही अंश है.. और हर एक आत्मा मुझसे निकली है जो फिर से मुझमें ही मिल जाएगी.. किंतु जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा करते हैं.. उन्हें करीब से देखने का सौभाग्य फिर कहां प्राप्त होगा।


ऐसा कहकर भगवान शंकर चले गए, और देवी पार्वती मंद मंद मुस्काती हुई उनके पीछे पीछे चल दी.. ऐसी पुण्य आत्माओं से मिलने का मौका भला देवी भी कैसे छोड़ सकती है!