“सृष्टि के तीन सूक्ष्म मूलभूत तत्त्व:” सत्व, रज एवम् तम !!!

सृष्टि की रचना मूल त्रिगुणों से हुई है, सत्त्व, रज एवं तम । ये तीनों घटक सजीव-निर्जीव, स्थूल-सूक्ष्म वस्तुओं में विद्यमान होते हैं । इससे प्रत्येक वस्तु का व्यवहार भी प्रभावित होता है । मनुष्य में इनका अनुपात केवल साधना से ही परिवर्तित किया जा सकता है । 😍😘

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, सृष्टि स्थूल कणों से बनी है – इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, मेसन्स, ग्लुओन्स एवं क्वार्क्स परंतु आध्यात्मिक स्तर पर, सृष्टि उनसे भी अधिक मूल तत्त्वों से बनी है । इन मूल तत्त्वों को सूक्ष्म तत्त्व अर्थात त्रिगुण कहते हैं – सत्त्व, रज और तम । त्रिगुण शब्द में, त्रि अर्थात तीन, तथा गुण अर्थात सूक्ष्म घटक । 😇😇

हम इन तत्त्वों को सूक्ष्म इसलिए कहते हैं क्योंकि ये अदृश्य हैं, स्थूल नहीं है तथा किसी आधुनिक सूक्ष्मदर्शी यंत्र से भी नहीं दिखाई देते । भविष्य में तकनीकी रूप से प्रगत यंत्र भी इन तत्त्वों को मापन नहीं कर पाएंगे । त्रिगुण केवल छठवीं ज्ञानेंद्रिय क्षमता द्वारा ही अनुभव किए जा सकते हैं । 🙌🙌

‘सत्त्व गुण’ त्रिगुणों में, सबसे सूक्ष्म तथा अमूर्त है । सत्त्व गुण दैवी तत्त्व के सबसे निकट है । इसलिए सत्त्व प्रधान व्यक्ति के लक्षण हैं – प्रसन्नता, संतुष्टि, धैर्य, क्षमा करने की क्षमता, अध्यात्म के प्रति झुकाव इत्यादि । 😘😘

‘तम गुण’ त्रिगुणों में सबसे कनिष्ठ है । तम प्रधान व्यक्ति, आलसी, लोभी, सांसारिक इच्छाओं से आसक्त रहता है । 🤬🤬

‘रजो गुण’ सत्त्व तथा तम को उर्जा प्रदान करता है तथा कर्म करवाता है । व्यक्ति यदि सात्त्विक हो, तो सत्त्व प्रधान कर्म को उर्जा प्रदान करता है तथा यदि तामसिक हो तो तम प्रधान कर्म को उर्जा प्रदान करता है । 💫💫

“त्रिगुण और पंचमहाभूत:”

पंचमहाभूत भी त्रिगुणों से बने हैं । पंचमहाभूत – पृथ्वी, जल, तेज, वायु तथा आकाश है । पंचमहाभूत अदृश्य हैं तथा स्थूल रूप में हमें दृश्यमान होनेवाले घटकों से भी सूक्ष्म हैं । उदाहरण, जल का निर्माण सूक्ष्म आपतत्त्व से हुआ है, जिससे नदी तथा समुद्र बनते हैं । संक्षिप्त में पंचमहाभूत ब्रह्मांड के निर्माण में आधारभूत घटक हैं । परंतु वे भी त्रिगुणों से बने हैं । 🌧🌧

मनुष्य अधिकांश पृथ्वीतत्त्व तथा जलतत्त्व से बना है । जब किसी व्यक्ति की अध्यात्मिक उन्नति होती है, वह उच्चतर स्तर पर कार्य करने लगता है, जैसे तेजतत्त्व । इस स्तर के आध्यात्मिक उन्नत व्यक्ति से विशिष्ट रूप का तेज प्रक्षेपित होता प्रतीत होता है । जब ऐसा होता है, उस जीव की मूलभूत इच्छाएं भी अल्प होती जाती हैं, जैसे अन्न तथा नींद । इसके अतिरिक्त, बोधगम्यता तथा कार्य करने की क्षमता संख्यात्मक तथा गुणात्मक रूप से प्रचंड मात्रा में बढ जाती है । 🔥🔥

“त्रिगुण और प्राकृतिक आपदाएं:”

यदि पृथ्वी पर रज-तम बढता है, तो इसका रूपांतर युद्ध, आतंकी गतिविधियों तथा प्राकृतिक आपदाओं आदि की वृद्धि में होता है । रज-तम की मात्रा बढने पर, पंचतत्त्व असंतुलित हो जाते हैं, जिसका रूपांतर महाविपत्ति में तथा प्राकृतिक आपदाओं में होता है । 👏👏

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