रिश्ता, इंसानियत का 🙍‍♀️🙍‍♂️

कितनी भी जल्दी कर लो पर रोज लेट हो ही जाती हूं, ऊपर से अब ऑटो भी नहीं मिल रहा.. ये कहते कहते चंदा बाई कुछ आगे को निकल आई, मेन रोड से शायद मिल जाए ऑटो

घर से निकलने का समय था 8 बजे रोज, उठती तो 5 बजे है पर पहले पूजा, फिर सारा काम घर का.. पति छोड़ गया है 5 साल पहले, बेटू को स्कूल के लिए रेडी करना और बेटी के लिए खाना बनाकर तैयार करना.. वो अभी गर्भवती है और कोई देखने वाला नहीं, हां पास में ही रहती है सो थोड़ा खयाल रखा जा सकता है

ऑटो मिलते मिलते 8:30 बज गए, अब कोमल मालकिन बहुत सुनाएगी.. उन्होंने आज जल्दी बुलाया था और यहां तो और भी लेट हो गया.. ये कहानी रोज की हो चली, अब चंदा बाई भी क्या करे

8 घरों का काम करती है, सुबह जो निकलती है तो वापस आते आते 9 बज जाती.. आने से पहले घर का काम, वापस जाकर काम और दिन में मुश्किल से 1 घंटा आराम मिलता है

सोचते सोचते पता ही नहीं चला कब कोमल मेमसाब ने दरवाजा खोला, कुछ चंदा बोले इसके पहले ही कोमल ने अपना बोलना शुरू कर दिया वो भी बहुत गुस्से में.. अब 10 मिनट सिर्फ सुनना है, काम भी अतिरिक्त से दिया सो अलग

चंदा के सर पर बैंक का लोन है जो उसने पिछले साल घर के लिए लिया सो ज्यादा काम भी ले लिया और वो अकेली जान, कभी किसी घर नहीं भी जा पाती जब लेट हो जाती

आज 7 घर काम करते करते बज गया 9, जब आखिरी घर में पहुंची तो घोष बाबू इंतजार ही कर रहे थे क्यूंकि आने का समय 8 के आसपास का था.. वो अकेले ही रहते थे सो खाना चंदा ही बनाती है.. घोष बाबू ने जब देखा चंदा बाई को तो समझ लिया की उसकी हालत आज पहले ही से थोड़ी खराब है और बीमार भी लग रही

चंदा ने माफी मांगी देरी से आने की और लग गई अपने काम में, इधर घोष बाबू ने कुछ सोचा और कहा बाई से कि मैं भी आज देरी से आया और तुम चिंता मत करो, डिनर ऑफिस की एक पार्टी में ही हो गया.. तुम आज घर जाओ, कल भी मैं बाहर जा रहा सो मत आना..

ऐसा कहकर उन्होंने चंदा बाई को दबाव देकर घर भेज दिया, यही सोचकर कि उसे थोड़ा आराम मिल जाए.. खाना तो वो स्विगी से बुला लेंगे

उधर चंदा बाई सोच रही थी कि ऐसे भी अच्छे लोग हैं जो मुझे समझते हैं.. वरना बाकी घरों कि कहानी तो लगभग एक जैसी ही है..

सोचकर वो भावुक हो गई, एक अजीब सा रिश्ता बन गया था दोनों में.. आज से नहीं बल्कि काफी पहले से.. रिश्ता, एक इंसानियत का…

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