होली के रंग 🌈🥳🌈🥳🌈

होलिका दहन इस वर्ष थोड़ा जल्दी होना था, शाम 7 बजे और इसीलिए उसमें शामिल होने के लिए मैं 6 बजे ही निकल गया घर से.. जहां मैं रहता हूं वो नई सोसायटी है सो होली दहन के लिए मुझे दूसरी जगह जाना था 🚶‍♂️

पास ही में एक बड़ी टाउनशिप है, वहां जरूर दर्शन पूजा हो जाएगी ये सोचकर उसी तरफ निकल गया.. रास्ते में नारियल, फूल और पूजा के लिए जरूरी सामान लेना था 😎

अकेला रहता हूं सो घर में कंकू गुलाल भी नहीं रहता, टाउनशिप के थोड़ा पहले कॉर्नर में दुकान है जहां सब मिल जाएगा..  दुकान पर थोड़ी भीड़ जरूर थी पर मेरा काम 10 मिनट में हो गया, वहां से आगे निकला ही था कि पीछे से आवाज़ आई.. भैया जी! 🙋‍♀️

पीछे मुड़कर देखा तो एक 12 साल की बच्ची अलग अलग तरह के रंगों के बीच बैठी हुई थी, जाहिर है वो रंग बेचने के लिए ही बैठी थी.. मैंने पूछा क्या हुआ सो बोली कि मेरे पास सारे तरह के रंग है, आप जो चाहें ले ले और दाम भी बहुत कम हैं 🌈

मुझे दाम से कुछ खास समस्या नहीं थी पर रंगों का क्या करना, सालों से रंगों कि होली नहीं खेली.. अब अकेले रहकर वो उत्साह भी ना रहा और फिर बड़े शहर के माहौल में गांव वाला अपनों का प्यार कहां 🧏‍♂️

मैंने उसे साफ साफ मना कर दिया कि देखो बेटी मैं तो अकेले ही रहता हूं और होली नहीं खेलता.. वो बोली मेरे पास लाल, नीला, पीला, गुलाबी, नारंगी, सफेद, काला, बैंगनी सारे रंग हैं.. ले लो ना भैया आपको जो भी ठीक लगे, दो तरह के रंग तो आपको लेना ही पड़ेंगे 🤷‍♀️

वो कुछ दृढ़ता से बोली इस उम्मीद में कि मैं जरूर खरीद लूंगा पर मेरा मन बिल्कुल भी नहीं था, कितने सालों से रंग खेलना तो दूर बल्कि देखे भी नहीं हैं.. सो मैं बिना कुछ कहे आगे को निकल गया 🚶‍♂️

ठीक 7 बजे होलिका दहन स्थल पर पहुंच गया जहां थोड़ी ही देर में उत्सव शुरू हुआ, दर्शन करके मैं आधे घंटे में वापस आने को हुआ.. वहां लोग जरूर एक दूसरे को गुलाल लगा रहे थे पर मुझे कोई जानता नहीं था सो किसी ने कुछ कहा नहीं 😊

टाउनशिप से बाहर आया, वापिसी का रास्ता वही था जहां से गया था.. मैं अपने रास्ते आ रहा था कि फिर पीछे से आवाज़ आई, भैया जी! 🙋‍♀️

फिर से वही लड़की, अरे बेटी नहीं चाहिए मुझे कोई रंग वंग.. तुम दूसरों को बेचो, थोड़ी कड़क आवाज़ में बोला मैंने इस बार और गुस्से से आगे बढ़ गया 🤷‍♂️

पीछे से फिर आवाज़ आई, भैया जी रंग मत लो पर थोड़ी खुशी, थोड़ी हंसी.. शांति, सुख, समृद्धि ले लो और अपने लिए नहीं तो दूसरों के लिए ले लो 😳

सुनकर मुझे कुछ आश्चर्य हुआ, कौतूहलवश में उसके पास गया और पूछा की ये सब क्या बोल रही हो.. उसने बड़े ही प्रेम से समझाया कि देखो भैया जी अगर आप इसे रंग समझो तो ये रंग हैं नहीं तो बहुत गहरा अभिप्राय है, हर रंग का अपना अर्थ है.. जब हम एक दूसरे को रंग लगाते हैं तो वो सिर्फ मस्ती के लिए नहीं होता बल्कि हमारी भावनाएं जुड़ी होती है और कहीं ना कहीं हम दूसरों के लिए अपना आशीर्वाद या उसकी खुशी के लिए अनुग्रह करते हैं ईश्वर से 🧏‍♀️

वो बोलती ही जा रही थी और मैं एकटक उसे देख रहा था.. सुन रहा था, लग रहा था कोई बड़ा बुजुर्ग ये सारी बातें कर रहा 🧎‍♂️

देखो! ये लाल रंग है जो प्यार, लगाव जुनून और समृद्धि का प्रतीक है.. नारंगी रंग अच्छे स्वास्थ्य, रचनात्मकता और जीवन का प्रतीक.. पीला रंग खुशी, आशाएं और सुख का प्रतीक.. हरा रंग नई शुरुआत, विकास एवं प्रचुरता.. वहीं नीला रंग शांति, जवाबदारी एवं आध्यात्म!! वो एकटक बोलती ही जा रही थी, काला रंग शक्ति, शिष्टता.. सफेद रंग आचरण, शुद्धता.. बैंगनी रंग कल्पना, नवरचना.. भुरा रंग निष्ठा का प्रतीक… गुलाबी रंग मिठास, आकर्षण, विलक्षण एवं मन मोहकता का प्रतिरूप 🌈🥰🌈

ऐसे ही उसने जाने कितने रंगों का अर्थ मुझे समझा दिया, उसके मन के भाव बहुत शुद्ध थे.. छोटी सी उम्र में इतनी समझदारी की बातें, जरूर उसके मां बाप ने ही सिखाई होगी पर जो भी हो उसने कहा कुछ इस तरह की मेरे दिल को उसकी बात गहराई से छू गई 🧐😘

रंगों के नाम तो बहुत सुने लेकिन अर्थ 1-2 से ज्यादा शायद ही पता हो, और जिस खूबसूरती से उस लड़की ने समझाया तो निश्चित रूप से होली खेलने की गहराई का पता चला.. ये रंग सिर्फ मस्ती का त्योहार ना होकर उससे कहीं ज्यादा हमारी भावनाएं, दूसरों के लिए सकारात्मक सोच, आशीर्वाद और उनके मंगल जीवन की कामना लिए एक प्रार्थना है ईश्वर से 👏🤗

एक अदभुत खुशी के साथ मैंने सारे तरह के रंग उससे खरीद लिए और कल रंगों की होली खेलने की योजना भी बना ली, किस किस को आमंत्रित करना है और इस दिन को यादगार बनाना है.. कुछ दुआएं देकर, कुछ दुआएं लेकर 💫😚

वो छोटी सी लड़की मुझे ज्ञान का एक महान पाठ पढ़ा चुकी थी, वो फिर उसी मासुमता के साथ अपने रंग बेचने लग गई.. उसके लिए शायद ये एक सामान्य घटना हो पर मेरे दिल पर वो जीवन पर्यन्त के लिए छाप छोड़ चुकी थी…

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